यहां लड़कियों का होता है जबरन दर्दनाक खतना पढ़कर दहल जायेगा दिल !

पूरे विश्व में लोग अपने-अपने रीति-रिवाज और त्योहारों को अपने दंग से मनाते हैं लेकिन साउथ अफ्रीका में तो बहुत ही अनोखा और दर्दनाक त्योहार मनाया जाता है, जिसे खतना मौसम कहते हैं। इसमें कई लड़कियों का जबरन खतना कर दिया जाता है ।

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रिवाज और प्रथाओं के नाम पर अमानवीयता तो आये दिन सामने आती ही रहती है परन्तु यह करतूत आपको हैरत में डाल देगी l खतना नाम की यह प्रथा अत्यंत क्रूर और अमानवीय ही नहीं वरन उस समाज और देश के कानून और संविधान की भी खिल्ली उडाता नज़र आता है । महिलाओं और पुरुष दोनों में खतना होता है ।

एक साल की दुधमुंही बच्ची के हाथ-पैर कुछ अौरतें पकड़तीं हैं और एक अौरत चाकू या ब्लेड से उसकी भगनासा (क्लाइटोरल हुड) काट देती है l खून से लथपथ बच्ची महीनों तक दर्द से तड़फती रहती है l यदि वो भाग्यशाली होती और पैसे वाले घर की होती तो यही काम डॉक्टर एनेस्थीसिया देकर करता l एक साल से लेकर चार से पांच साल तक की बच्चियों की योनी की पूरी भगनासा (क्लाइटोरल हुड ) को काट के फेंक दिया जाता है या फिर भगनासा और उसके आसपास के भगोष्ठ को बुरी तरह से छील दिया जाता है l कई बार इस से बच्चियों की मौत भी हो जाती है l

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आपने एफ.जी.एम. का नाम तो सुना ही होगा, जिसका मतलब है फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन । केन्या के गांवों में लड़कियों का खतना किया जाता है । यह खतना इसलिए किया जाता है कि वहां के कबीले के लीडर का मानना है कि ऐसा कर देने के बाद लड़कियां धोखेबाज नहीं होती हैं । ऐसा करने के बाद लड़कियां अपने मनोभावों पर नियंत्रण कर पाती हैं ।

ऐसा दर्दनाक काम धारदार ब्लेड से किया जाता है । दर्दनाक खतना करने से प्राइवेट पार्ट में इंफैक्शन और दर्द न सहने की वजह से उनकी मौत भी हो जाती है । अन्ना मूरा इस काम को पिछले 70 सालों से कर रही हैं हांलाकि इससे होने वाली लड़कियों की मौतें और इंफैक्‍शन के केस इतने ज्यादा हैं कि इसे वहां की सरकार ने गैर-कानूनी करार दिया है । फिर भी लोग इस काम को करने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं ।

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खतना से पी‌ड़ित लगभग यूरोप में 7 लाख लड़कियां रहती हैं, एक लाख अमरीका और और फ्रांस में भी। इस काम के विरोध में खड़े होने वाले ईस्टर ओगेटो का कहना है कि उन्होंने देखा है कि जिस लड़की का खतना कर दिया जाता है, उसे शादी के दौरान लड़के भी मिल जाते हैं । साथ ही मेंदहेज और गाय भी लेकिन जिसका खतना न हुआ हो, उन लड़कियों को लड़के नहीं मिलते । फिलहाल इसका विरोध दुनिया के कई हिस्सों से जारी है ।

स्त्रियों के खतना का यह बेहद क्रूर,दर्दनाक और अमानवीय बहुत प्राचीन रिवाज अफ्रिका महाद्वीप के मिस्र, केन्या, यूगांडा,इरीट्रिया जैसे बीसों देशों में यह परम्परा परम्परा सदियों से चली आ रही है l अफ्रीका में युवा लड़कियों की शादी तभी होती है अगर उन्होंने बचपन में खतना करवाया होता है क्योंकि वहां पर लड़कियों का खतना ही उनके कुंआरे और पवित्र होने का प्रमाण माना जाता है l

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अफ्रीका के कई हिस्सों में लड़कियों का खतना केवल भगनासा काटने या छिलने तक ही सिमित नहीं है वो तो मानव क्रूरता के चरमोत्कर्ष की एक घृणित मिसाल है l वहां पर छोटी लड़कियों का खतना एक सार्वजनिक समारोह जैसा होता है जिसमें दर्द से छटपटाती और चीखती लड़की को भीड़ चारों ओर से घेरे रहती है और खतना करने वाली महिला या मर्द किसी टूटे शीशे के टुकड़े, चाकू या फिर रेजर के इस्तेमाल हो चुके ब्लेड से लड़की की योनिद्वार को कवर करने वाले अंगों क्लिटोरिस को काटकर अलग कर देता है और इसके बाद खून के रिसाव के बीच योनिद्वार के दोनों हिस्सों को आपस में सिल देता है l

लड़कियों का खतना करने के पीछे एक संकीर्ण पुरुषवादी मानसिकता जिम्मेदार है कि वो लड़की युवा होने पर अपने प्रेमी के साथ यौन संबंध न बना सके l पहला बच्चा होने के बाद पति को कुछ दिनों के लिए यदि कहीं दूर जाना है तो वो अपनी पत्नी को अपनी योनि फिर से सिलवाकर बंद करने के लिए बाध्य करता है ताकि उसकी पत्नी किसी अन्य पुरुष के साथ संसर्ग न कर सके l

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उत्तरी मिस्र को अपनी उत्पत्ति का मूल स्रोत मानने वाले एक समुदाय विशेष के लोग महिला खतना को अपनी परम्परा और पहचान मानते हैं l ये समुदाय इस्मायली शिया समुदाय का एक उप समुदाय है जो सारी दुनिया के साथ साथ पश्चिमी भारत और पाकिस्तान में भी बड़ी संख्या में रहते हैं यही वजह है कि पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में स्त्रियों का खतना करने का रिवाज आज भी जारी है l

खतना या सुन्नत यहूदियों और मुसलमानों में एक अनिवार्य धार्मिक संस्कार होता है l इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत लड़का पैदा होने के कुछ दिनों के बाद से लेकर चार पांच साल तक के भीतर उनके लिंग के आगे की चारो ओर की चमड़ी निकाल दी जाती है l इस दर्दनाक परन्तु अनिवार्य प्रकिया के दौरान बच्चें के लिंग से काफी खून भी गिरता है और आंसुओं की झड़ी भी कई रोज तक जारी रहती है l अमीर घरानों के बहुत से सम्पन्न लोग यही कार्य डॉक्टरों से पूरा कराते हैं l डॉक्टर ये धार्मिक संस्कार बच्चे को एनेस्थीसिया देकर पूरा करते हैं जिसमे तकलीफ कम होती है l अफ्रिकी देशों सहित कुछ देशों के मुस्लिम स्त्री का खतना करने की प्रथा को अपनाये हुए हैं l उनमे यह अमानवीय प्रथा यहूदियों, अफ्रिकी काबाइलियों और आदिवासियों से आई है l

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अफ्रिकी देशों सहित कुछ देशों के मुस्लिम स्त्री का खतना करने की प्रथा को अपनाये हुए हैं l उनमे यह अमानवीय प्रथा यहूदियों, अफ्रिकी काबाइलियों और आदिवासियों से आई है l स्त्री खतना के संबंध में इस्लामिक धर्म-ग्रंथों में कोई विवरण नहीं मिलता है l लेकिन इंटरनेट पर बहुत अध्ययन के बाद ये जानकारी मिलती है कि सहीह मुस्लिम किताब ३ हदीस ६८४ और किताब ४१ हदीस ३२५१ में बहुत विस्तार से इसका जिक्र किया गया है l उसमे कहा गया है कि “यदि कोई खतना वाले पुरुष का अंग (लिंग ) किसी बिना खतना वाली स्त्री के अंग (योनी ) में प्रवेश करता है, तो उस पुरुष को गुस्ल (स्नान ) करना जरुरी है l ” इसीलिए कुछ देशों में मुसलमान बार बार नहाने से बचने के लिए लड़कियों का खतना करा देते है l सहीह मुस्लिम किताब ४१ हदीस ३२५१ से यह ज्ञात होता है कि मुहम्मद साहब के समय में मदीना में स्त्रियों का खतना होता था l

आज भी ये प्रथा बहुत से देशों में जारी है l इस प्रथा के अंतर्गत स्त्री जननांगों के ऊपरी भाग भगनासा को पूर्ण या आंशिक रूप से हटा दिया जाता है l स्त्री देह में भगनासा एक घुंडी जैसी होती है, जिसे पुरुष जननांग का का छोटा रूप कहा जा सकता है l कुदरत ने इसे बहुत सोच समझकर बनाया है l इसे काट के हटा देना या छीलकर इसके संवेदनशीलता को कम कर देना कुदरत ओर ईश्वर दोनों की ही दृष्टि में अक्षम्य अपराध है l इसके कारण सहवास के दौरान स्त्री को उत्तेजना, आनंद ओर चरमसुख मिलता है l ये स्त्री की मासिक धर्म और प्रसव पीड़ा को कम करता है l इससे छेड़छाड़ करना महिलाओं के साथ बहुत बड़ा अन्याय और अत्याचार है l

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दुनिया के कई देशों में धार्मिक अनुष्ठान या धार्मिक क्रिया-कर्म के नाम पर मासूम बच्चियों पर आज भी ये अत्याचार जारी है l मासूम बच्चियां कई महीने तक दर्द से छटपटाती रहती हैं l लड़कियों का खतना होने के बाद उनके जननांगों में संक्रमण होने से बहुत से बच्चियों की मौत तक हो जाती है l खतना हुई लड़कियों की जब शादी होती है तो अपने पति से सम्बन्ध बनाने में और बच्चे पैदा करने में उन्हें भयानक कष्ट झेलना पड़ता है l ऐसी लड़कियों के पति उनपर ठण्डी औरत (सेक्स में रूचि न लेने वाली) होने का आरोप भी लगाते हैं l

कुछ देशों में स्त्री खतना पर शोध करने वाले विद्वानों ने पाया कि बच्ची और माँ के न चाहने पर भी घर की बूढी ओरतें जैसी नानी और दादी अपना रौब दिखाकर या लड़की के बिगड़ जाने का भय दिखाकर जबरदस्ती खतना करवा देती है l लड़कियों का खतना करने के पीछे उनकी परम्परा से चली आ रही मूल मानसिकता यही है कि खतना होने से लड़की सेक्स के मामले में संवेदनहीन हो जाएगी और विवाह से पूर्व किसी भी पुरुष से सेक्स सम्बन्ध बनाने में दिलचस्पी नहीं लेगी l खतने का दुष्परिणाम ये निकलता है कि शादी के बाद पति से भी सेक्स संबंध बनाने में लड़की की रूचि कम हो जाती है क्योंकि सहवास के दौरान उसे बहुत कष्ट होता है और उसे इस प्रक्रिया में कोई आनंद भी नहीं मिलता है हालाँकि इस प्रथा को मानने वालों का यह भी तर्क है कि खतना हो जाने से स्त्री के जननांग ज्यादा साफ-सुथरे रहते हैं l

इस प्रथा को मानने वालों का यह भी कुतर्क है कि खतना हो जाने से स्त्री के जननांग ज्यादा साफ-सुथरे रहते हैं l हालाँकि वास्तविक रूप में ये बात बिलकुल गलत है l हर स्त्री अपने जननांगों को अच्छी तरह से सफाई हर रोज स्ययं करती है l कितने दुःख की बात है कि आज भी इस दुनिया के बहुत से लोग अपनी क्रूर और अमानवीय परम्पराओं के साथ प्राचीन युग में ही जी रहे हैं l आज दुनिया की अधिकतर आबादी एक विकासशील और नए युग में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ पर महिलाऐं सदियों बाद स्वतंत्रता की खुली हवा में साँस ले रही हैं l

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अत: महिला खतना जैसी जंगली और क्रूर प्रथा तत्काल बंद होनी चाहिए l विश्व के जिन देशों में ये अमानवीय और आदिवासी प्रथा आज भी जारी है, उसे बंद कराने के लिए वहां की सरकार और सामाजिक संस्थायें आगे आयें और लोंगो को इस आदिम और निंदनीय प्रथा को त्यागने के लिए जागरूक करें l

दुनियां के जिन हिस्सों में भी ये अमानवीय प्रथा आज भी जारी है, वो वर्तमान समय के हमारे प्रगतिशील और आधुनिक समाज के लिए एक बहुत बड़ा कलंक हैंl
!! जयहिन्द !!
!! वन्देमातरम !!

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