सऊदी अरब ने इजराइल को लेकर लिया बेहद सनसनीखेज फैसला, पाक मुस्लिम रोये खून के आंसू !

नई दिल्ली : कट्टरपंथी आतंक का पूरी दुनिया से नामोनिशान मिटने वाला है. सलाफी कट्टरपंथ की आड़ में आतंक का जनक सऊदी अरब अब घुटनों पर आ रहा है. सऊदी अरब में पिछले काफी वक़्त से तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है, ऐसे में आधी सदी से भी ज्यादा वक्त तक तेल पर निर्भर रहने के बाद सऊदी अरब अब कमाई के अन्य साधन तलाश रहा है. ऐसे में सऊदी अरब ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे देख पाकिस्तान समेत दुनियाभर के मुस्लिमों की मानो दुनिया ही हिल गयी है.

इजराइल के साथ संबंध बहाली के लिए तैयार सऊदी अरब !
सऊदी अरब ने इजराइल के साथ संबंध बहाली का प्रस्ताव पेश कर दिया है. जिसे देख दुनियाभर के उन कट्टरपंथी मुस्लिमों की दुनिया ही मानो हिल गयी है, जिन्हे जन्म से केवल यही सिखाया गया कि यहूदी उनके दुश्मन हैं. आइये अब आपको बताते है कि आखिर सऊदी ने ऐसा सनसनीखेज कदम उठाने का फैसला क्यों लिया.
कंगाली के कगार पर सऊदी
दरसल 2014 के बाद तेल कारोबार में तेजी से मंदी आयी, जिससे हालात बदल गए. सऊदी सरकार के राजस्व में काफी कमी आती जा रही है. बीते वर्ष बजट घाटा रिकॉर्ड 97 अरब डॉलर रहा था. यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र की सबसे बडी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले सऊदी अरब में, जहाँ अब तक कोई टैक्स नहीं वसूला जाता था और सरकार कई तरह की सब्सिडी भी देती थी. वहां 2018 की पहली तिमाही से सभी सेवाओं और उत्पादों पर 5 प्रतिशत की दर से वैट लगाया जाएगा.

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इजराइल से दोस्ती के पीछे स्वार्थ ?
इसके पीछे पैसों की यारी है, तेल कारोबार में भारी मंदी चल रही है और ऊपर से ईरान भी तेल बाजार में सऊदी अरब को अच्छी-खासी टक्कर दे रहा है. ऐसे में सऊदी अरब अब अपने दूसरे प्राकृतिक संसाधन यानी रेगिस्तान का रुख कर रहा है. सऊदी किंगडम हजारों किलोमीटर रेगिस्तानी जमीन पर नए-नए शहर बसाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि नौकरी और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सके.

को इजराइल की तकनीक की जरुरत तो पड़ेगी ही. इसी चक्कर में सऊदी अरब तेल के खेल की मुश्किलों को समझते हुए अब नई संभावनाएं तलाशने पर मजबूर हुआ है.


अमेरिका की मदद से दोस्ती की पहल !
हालांकि सऊदी अरब, इजराइल के साथ दोस्ती काफी गुपचुप रूप से धीरे-धीरे कर रहा है, ताकि कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क ना जाएँ. अभी सब कुछ पर्दे के पीछे है, लेकिन इस्राइल के चैनल-10 की रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब ने इस्राइल के साथ समझौते का कदम बढ़ा दिया है. सदियों से जिन्हे अपना दुश्मन माना है, उनसे सीधे जाकर कैसे कह दें कि चलो दोस्ती कर लो. इसलिए इसके लिए सऊदी ने अमेरिका का सहारा लिया है.

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकर कुश्नर और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कुश्नर दोनों अच्छे दोस्त हैं. अमेरिका के इजराइल से भी बहुत अच्छे संबंध हैं, इसलिए सऊदी अरब ने कुशनर के माध्यम से इजराईल के पास अपना संदेश पहुंचाया है. सऊदी अरब इजराइली व्यापारियों को वीजा देने पर राजी है.

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