मोदी सरकार ने लिया फर्जी धर्मान्तरण करने वाली ईसाई मिशनरीज के खिलाफ सबसे कड़ा कदम, ईसाई मिशनरियों में मचा हाहाकार !

ईसाई समूहों और चर्च से जुड़े समूहों जो विदेशो से गहन उगाही करते थे मोदी सरकार ने इन अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों ,NGO व मिशनरियों के खिलाफ अपने प्रयासों को तेज करते हुए कार्यवाई करना शुरू कर दिया है,ये समूह के.पी योहानन ने गठित किये थे।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में दक्षिण भारत मे अपना कब्जा जमाए बैठे 3 सहयोगी ईसाई चेरिटेबल ट्रस्ट जैसे :- अयाना चेरिटेबल ट्रस्ट,लव इंडिया मिनिस्ट्रीज और लास्ट ऑवर मिनिस्ट्री के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम के तहत इनके रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए है।

मोदी सरकार के अनुसार करुणा इंटरनेशनल और अन्य ईसाई मिशनरियों को भारत मे अवैध तरीके से ईसाई धर्मांतरण के लिए पैसा भेजा जा रहा है,और जैसा कि हमे पूर्वानुमान था कि ईसाई मिशनिरिया भारत सरकार के इस दावे का खण्डन जरूर करेंगी वैसा ही उन्होंने किया..उन्होंने ये कहा कि हमें हमपर लगे इन आरोपो को खारिज करने का मौका ही नही दिया मोदी सरकार ने।

ईसाई संगठनों के चर्च प्रवक्ता फादर सिजो पन्तपल्लील के अनुसार हम विदेशी धन नही ला रहे है( ये एक स्थायी संशोधन आदेश है जिसके अनुसार FCRA पंजीकरण 5 साल के लिए होता है उसके बाद उसका नवीनीकरण भी किया जाता)

जबकि भारत सरकार कर अनुसार एक रिपोर्ट से पता चलता है आयना चेरिटेबल ट्रस्ट ने पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 206 मिलियन अमेरिकी डॉलर्स अनुदान के रूप में प्राप्त किये।

एक याद रखने वाली बात ये भी है कि ग्रहमन्त्रालय ने 2016 में 6 ईसाई मिशनरी संगठनों और वर्ष 2015 में 10,011 मिशनरी संस्थाओ के रजिस्ट्रेशन इसलिए रद्द किए क्योंकि इन्हें विदेशो से भारी मात्रा में अनुदान मिल रहा था।

इस साल की शुरुआत में अमेरिकी कांग्रेस के लगभग 100 सदस्यो ने अमेरिका में स्थित क्रिश्चियन चाइल्ड स्पॉन्सरशिप संगठन “कंपास” इंटरनेशनल को भारत मे अपना काम जारी रखने के लिए भारतीय ग्रहमन्त्रालय को पत्र लिखते हुए आग्रह किया था ..कोलोराडो स्थित एक चेरिटी के अनुसार भारत सरकार की इस कार्यवाई से भारत में उस संस्था के करीब 147,000 बच्चे और 127 कर्मचारी व असंख्य युवा जिन्होंने इस चेरिटी के विभिन्न कार्यक्रमो में रजिस्ट्रेशन किया हुआ है बुरी तरह प्रभावित हुए है।

ये सभी लोग मिलकर भारत सरकार पर एक प्रकार का दबाव बनाने की कोशिश कर रहे है जिससे इन लोगो की दुकान सुचारू रूप से चलती रहे और इन पर किसी भी वर्कर का कोई प्रतिबन्ध न लगे.. परमोदी सरकर ने कठोर कार्यवाही करते हुए इस सभी ट्रस्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है।

फरवरी माह में डलास स्थित स्टेनली लॉ समूह ने GFA के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया, जिसमे आरोप लगाया गया कि मिशन एजेंसियां और सहयोगियों ने धर्मार्थ दान के लिए कई सौ करोड़ की मांग की और उस पैसे को http://के.पी”>के.पी योहानन के निजी खजाने में ट्रांसफर करवा दिया।

समस्या ये है कि ये मिशनिरिया विदेशी धन को अपने निजी खातों में जमा करती रही है और उस पैसे से भारत मे बड़े पैमाने पर भूखण्ड व चल अचल संपत्ति खरीदी जा रही है। साथ ही बहुत बड़े पैमाने पर लोगों का धर्मांतरण करा उन्हें ईसाई बनाया जा रहा है..।

अब हमें सोचना है और सही निर्णय लेना है क्या मोदी सरकार इन ईसाई मिशनरियों के वित्तपोषण को रोकने के लिए सही कार्यवाई कर रही है?
क्या आपको लगता है सरकार सही प्रकार से NGO को अवैध रूप से मिलने वाले पैसे के इस्तेमाल को नियंत्रित कर पा रही है।

सबसे बड़ा चौकाने वाला तथ्य ये की भारत के 8 बड़े राज्यो में ईसाई जनसँख्या बड़ रही है उसका कारण हिंदुत्व की निचली जातियों का ईसाई धर्मांतरण है।

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