ब्रेकिंग- योगीराज में भगवान् शिव के मंदिर में घुसे कट्टरपंथी, फिर जो हुआ उसे देख हिल जाएंगे आप !

लखनऊ : आये दिन साम्प्रदायिक हिंसा के मामले देश में बढ़ते ही जा रहे हैं. इसके बावजूद देश के कुछ तथाकथित सेक्युलर नेता देश में रोहिंग्या कट्टरपंथियों को घुसाने की वकालत कर रहे हैं. कुछ ही वक़्त पहले गणेश विसर्जन के दौरान देश में कई जगहों पर साम्प्रदायिक माहौल बन गया था और अब एक नया मामला भगवान् शिव के मंदिर को लेकर सामने आया है. ताजा मामला यूपी लखीमपुर थाना मैलानी की पुलिस चौकी कुकुरा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम मुड़ा खजुहा का हैं.

शिवा मंदिर में कूड़ा फेकने को लेकर काटा बवाल !
यहाँ भगवान् शिव का एक प्राचीन मंदिर है. पिछले कुछ दिनों से कुछ मुस्लिम यहाँ कूड़ा फेकना शुरू हो गए. प्रतिदिन कूड़ा देख आसपास के लोग बेहद हैरान थे. दरअसल खुद को शान्ति प्रिय समुदाय कहने वालों की योजना थी, कूड़ा फेंक-फेंक कर पूरी जगह को कूड़े के ढेर से धक् देंगे और जगह हथिया लेंगे. कल जब मंदिर की सफाई का काम चल रहा था, तो कुछ मुस्लिम युवक वहां आ गए और सफाई से रोकने लगे.

सफाई का काम जारी रहने पर, उन युवकों ने कई अन्य लोगों को बुला लिया. फिर देखते ही देखते कट्टरपंथियों की भीड़ जमा हो गयी. कट्टरपंथी मुस्लिम युवकों ने लाठी-डंडों से उनको मारना शुरू कर दिया. जिसके बाद हिन्दू भी भड़क उठे और झगड़ा काफी बढ़ गया. मुस्लिम युवकों ने कश्मीर की ही तर्ज पर पथराव शुरू कर दिया.

बुरी तरह घायल लोग !

An Indian Hindu pilgrim injured in a bus accident is brought for treatment at a hospital in Jammu, India, July 16, 2017.

हिंसा के चलते काफी लोगो को गम्भीर चोटे आई है. मिली जानकारी के मुताबिक़ कट्टरपंथियों ने वहां से आने-जाने वालों को भी पीटना शुरू कर दिया. यहाँ तक कि औरतो को भी नहीं छोड़ा गया. पथराव व् डंडों के कारण जियालाल पुत्र भवानी, मालती देवी पत्नी हरिचंदन लाल, कौसिल्या देवी पत्नी रामपाल पासी बुरी तरह से घायल हो गए. हालत गंभीर होने के कारण उन्हें फ़ौरन जिला अस्पताल रेफर किया गया.

हिंसा की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई. तब जा कर मामला शांत हुआ. मौके पर पहुची पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया और घायलों को अस्पताल में एडमिट करवाया. सवाल ये खड़ा हो रहा है कि रोहिंग्या मुस्लिमों को देश में बसाने की मांग करने वालों के समर्थक जिस तरह से देश की अलग-अलग जगह पर हिंसा व् उपद्रव मचा रहे हैं. उसे देखते हुए क्या इन पर सख्त एक्शन नहीं लेना चाहिए?

विपक्ष और मीडिया की भूमिका संदिग्ध ?
मंदिर में कूड़ा फेंकना कहाँ तक जायज हैं और जब आम लोग ऐसा करने से रोके तो उलटा उन पर लाठी डंडो वार करना. सबसे मजे की बात तो ये है कि तुष्टिकरण में अंधा हो चुका विपक्ष इन घटनाओं पर मुँह खोलने को तैयार नहीं. उसे तो ऐसे उपद्रवियों में भी केवल अपना वोटबैंक ही नज़र आ रहा है. खुद को देशभक्त बताने वाले देश के मीडिया चैनलों तक ये ख़बरें पहुंच ही नहीं रहीं हैं. सब के सब कैमरे लेकर गुडगाँव चले गए हैं और स्कूल के बच्चे की ख़बरों में ही व्यस्त हैं.

बाबा रहीम के नाम का बुखार मीडिया पर से उतर ही नहीं रहा है. कहीं कोई साजिश तो नहीं चल रही? एक ख़ास समुदाय के लोगों द्वारा की जाने वाली हिंसा की ख़बरों को दबाये जाने के लिए मीडिया के साथ कोई अंदरूनी सेटिंग तो नहीं चल रही है? क्योंकि ये बेहद हैरानी की बात है कि जयपुर में हुई हिंसा भी मीडिया को नहीं दिखी, केरल में हुई हिंसा भी नहीं दिखी, गुजरात में गणपति के जुलूस में हुई पत्थरबाजी भी मीडिया को नहीं दिखी और अब यूपी में हुई साम्प्रदायिक हिंसा भी नहीं दिखाई दे रही है. कुछ ना कुछ गड़बड़ तो जरूर है.

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