गंगा में बहता मिला शिवजी का डमरू अनेक लोगों ने की उठाने की कोशिश पर हुए असमर्थ वजह जान कर हो जाएँगे हैरान !

दोस्तों कहा जाता है कि भगवान होते हैं और वो अपनी कृपा सब पर बनाए रखते हैं. ऐसा कहा जाता है जिसका कोई नही होता उसका भगवान ही एक मात्र सहारा होता है. कुछ लोग तो इस बात को भी नही मानते कि भगवान हैं. लेकिन अगर आप किसी धार्मिक स्थान पर जाएँ और वहाँ बैठकर भगवान का ध्यान करें तो आपको भी यकीन हो जाएगा कि भगवान का भी अस्तित्व है.

वैसे तो कहा जाता है भगवान की मर्ज़ी के बिना पत्ता तक नही हिलता इसलिए इंसान अपनी जिंदगी के अच्छे बुरे समय में भगवान को ही याद करता है. आज हम आपको एक ऐसे वाक्य के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपको यकीन हो जाएगा कि भगवान हैं.

दोस्तों जैसा कि आप सभी जानते होंगे उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है. देवभूमि यानी कि देवों कि भूमि, हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के ऋषिकेश कि जहाँ हाल ही में एक आश्चर्य करने वाली बात सामने आई है.

ख़बरों में ऐसा कहा जा रहा है कि एक साधू ने गंगा में बहता हुआ एक डमरू देखा तभी वो उस डमरू को उठाने गया लेकिन उससे वह डमरू नही उठा. जब डमरू किनारे पर आ गया तो उसने लोगों को बुलाया सभी ने मिलकर उस डमरू को उठाने की कोशिश करी पर किसी से भी वो डमरू नही उठा.

उस डमरू को देखने वाले साधू ने कहा कि ये डमरू महादेव का है इसलिए इसे या तो पार्वती जी उठा सकती हैं या स्वयं महादेव उठा सकते हैं. अब तो लोग इस डमरू की पूजा कर रहे हैं.

वैसे उत्तराखंड का ऋषिकेश किसी स्वर्ग से कम नही है. हजारों लोग यहाँ अपने पापों का प्रायश्चित करने आते हैं. उत्तराखंड की इस देवभूमि के ऊँचे पहाड़, पहाड़ से निकलने वाली पवित्र गंगा, और राम-लक्ष्मण झूले की सुंदरता आपको इस जगह खींच लाएगी. जैसे की शास्त्रों में माना गया है कि शिवजी बहुत बलशाली हैं, उसी तरह उनका डमरू भी उतना ही बलशाली है. शिवजी अपने डमरू का प्रयोग तांडव करते समय करते थे इसलिए कहा जाता है कि उनका डमरू उनके अलावा कोई नही उठा सकता. यही वजह है कि उस डमरू को कोई भी इंसान उठा नही पाया.

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