ब्रेकिंग ; रातोंरात मस्जिद को लेकर हो गया इतना बड़ा कांड, जिसे देख पूरे देश में मच रहा बवाल !

नई दिल्ली  : आपको याद ही होगा इसी साल अप्रैल के महीने में गायक सोनू निगम ने मस्जिद के बेहद तेज़ लाउडस्पीकरों पर सुबह सुबह अज़ान की वजह से उनके नींद टूटने को लेकर ट्वीट करते हुए बड़ी आपत्ति जताई थी. जिसके बाद पूर्रे देश में इस पर विवाद खड़ा हो गया था. इसके बाद सोनू निगम ने मस्जिदों में तेज़ आवाज़ पर बजने वाले लाउडस्पीकरों को धर्म की गुंडागर्दी भी कहा था. इसी मुद्दे को एक बार फिर हवा मिल गयी है. कक्षा छः की एक किताब में मस्जिद को लेकर बेहद चौंकाने वाली बात छाप दी है.

सोनू निगम ने उठाया था मस्जिदों में लाउडस्पीकर का मुद्दा

आपको बता दें सोनू निगम के मस्जिदों पर तेज़ लाउडस्पीकर बजाने के मुद्दे को उठाने के बाद इसके कई सकारात्मक नतीजे भी देखने को मिले थे. जैसे केरल में अनेकों मस्जिदों ने मिलकर यह तय किया कि वे अब से लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल नहीं करेंगे क्यूंकि आसपास स्कूल होते हैं, बच्चों को परेशानी होती है, अस्पताल होते हैं, मरीजों को परेशानी होती है. बुज़ुर्गों को परेशानी होती है. इस फैसले की तारीफ भी की गयी

कक्षा छठी की किताब में मस्जिद को लेकर छाप दी इतनी बड़ी बात

इसी मुद्दे को अब एक बार फिर से हवा मिल गयी है दरअसल ICSE बोर्ड ने छठीं क्लास की किताब में छपी तस्वीर में मस्जिद को ध्वनि प्रदूषण का एक बड़ा कारण बताया है. इस किताब में एक चित्र भी छापा है जिसमें ध्वनि प्रदुषण के स्रोतों से किस तरह पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है ये दिखाया गया है. इस चित्र में ट्रेन, कार, विमान और मस्जिद से निकल रही तेज़ आवाजों को दिखाया गया है. इस चित्र में एक व्यक्ति भी है जिसने अपने दोनों कान बुरी तरह दबा रक्खें हैं और वो ट्रेन, कार, विमान और मस्जिद से तेज़ आवाज़ निकलने से तड़पता हुआ दिखाई दे रहा है.Image result for मस्जिद तोड़ दी

किताब पर बवाल

इस किताब को सेलिना पब्लिशर्स ने प्रकाशित किया है. मस्जिद को ध्वनि प्रदूषण के कारण दिखाने के बाद यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेज़ी से फ़ैल गयी और कुछ लोगों ने इस पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करना शुरू कर दिया. तस्वीर शेयर होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग किताब को वापस लेने की मांग करने लगे थेRelated image

जिसके बाद प्रकाशक हेमंत गुप्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम किताब के आने वाले संस्करणों में चित्र बदल देंगे, अगर इससे किसी की भी भावनाएं आहत हुई हों तो हम इसके लिए माफी मांगते हैं. हालांकि आईसीएसई ने कहा कि बोर्ड ने किताब का प्रकाशन या उसे पढ़ाने की सिफारिश नहीं की और इस मामले से स्कूलों को ही खुद निपटना होगा. आगे उन्होंने कहा अगर आपत्तिजनक सामग्री वाली कोई किताब कुछ स्कूलों में पढ़ायी जा रही है तो इस तरह की चीज ना हो, यह सुनिश्चित करने का काम स्कूलों एवं प्रकाशक का हैImage result for मस्जिद तोड़ दी

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*