भारत सोने की चिड़िया होता अगर ये 5 ग़ददार ना होते !

हमारे देश का इतिहास बहुत जायदा गौरवपूर्ण है .एक से एक महान राजाओ ने हमारे देश में जन्म लिया है लेकिन उन् सब में एक ही कमी थी की उन् सभी राजाओ की आपसी दुश्मनी थी जिस वजह से तीसरा इसका फायदा उठा लेता था . हमारे भारत को प्राचीन काल से ही सोने की चिड़िया कहलाने का गौरव प्राप्त था, लेकिन जब सोने की चिड़िया कहे जाने वाले हमारे भारत पर अंग्रेजों ने कब्ज़ा किया उसके बाद भारत से वो गौरव छिन गया. हम सभी ने जब भी अपने इतिहास के बारे में पढ़ा या सुना है तो उससे हमे बस यही पता चलता है कि हमारे भारत को बर्बाद करने के पीछे ना केवल अंग्रेजों का बल्कि कई आक्रमणकारीयों का भी हाथ रहा है. हम हमेशा भारत के बाहर से आये अंग्रेजों को ही दोषी मानते रहे हैं, जबकि उनसे ज्यादा भारत को बर्बाद करने के पीछे भारत के ही लोगों का हाथ रहा है.

.हमारे भारत में प्राचीनकाल से धोकेबाजों के लिए कई प्रकार की कहावतों का इस्तेमाल किया जाता रहा है, जैसे कि पीठ पर खंजर भोगना , विभीषण होना या जयचंद होना. इन सभी कहावतों में एक बात समान है कि इन सभी कहावतें में जिन लोगों का जिक्र किया गया है उन सभी को धोकेबाज माना जाता रहा है. आज हम आपको भारत के उन गद्दारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके कारण ही सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत का आज ये हाल है .

जयचंद

जब-जब इसतिहास के पन्नों में राजा पृथ्वीराज चौहान का नाम लिया जाता है, तब-तब उनके नाम के साथ नाम और जुड़ता है वो नाम है जयचंद. जयचंद कन्नौज का साम्राज्य का राजा था और पृथ्वीराज चौहान के साथ उसकी दुश्मनी बहुत पुरानी थी और उन दोनों के बीच कई बार भयंकर युद्ध भी हो चुके थे. इसके बाबजूद पृथ्वीराज संयोगिता से शादी करके जयचंद का दामाद बन गया था . फिर जयचंद अंदर ही अंदर पृथ्वीराज का और बड़ा दुश्मन बन गया और मौके की तलास करने लगा. इसी बीच जयचंद को पता चला कि मोहम्मद गौरी भी पृथ्वीराज से अपनी हार का बदला लेना चाहता है.

पृथ्वीराज चौहान को हराने के लिए जयचंद और गौरी मिल गए. गौरी का साथ देने के पीछे जयचंद की एक बहुत बड़ी चाल थी. जयचंद इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि वह अकेले पृथ्वीराज से नहीं जीत सकता और अगर मोहम्मद गौरी पृथ्वीराज से युद्ध जीत जाता है तो उसे उपहार के रूप में दिल्ली की सत्ता मिल जायेगी. दिल्ली की सत्ता के लालच में जयचंद ने मोहम्मद गौरी का साथ दिया और युद्ध में जयचंद ने गौरी को अपनी सेना देकर पृथ्वीराज को हरा दिया. लेकिन युद्ध जीतने के बाद गौरी ने राजा जयचंद को भी मार दिया और उसके बाद गौरी ने कन्नौज और दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों पर कब्जा कर लिया. गौरी के राज करने के बाद जो कुछ हुआ हम उसके बारे में जानते ही हैं.

मानसिंह

हिन्दुस्तान के दुसरे देशद्रोही का नाम है मानसिंह. एक तरफ जहाँ महाराणा प्रताप भारत वर्ष को आज़ाद कराने के लिए दर-दर भटक रहे थे और जंगलो में रहकर घास की रोटियां खाकर देश को मुगलों से बचाने की कोशिश कर रहे थे तो वहीं मानसिंह मुगलों का साथ दे रहे थे. राजा मानसिंह मुगलों के सेना प्रमुख थे और वह आमेर के कच्वाहा राजपूत राजा थे. महाराणा प्रताप और मुगलों की सेना के बीच लड़े गए हल्दी घाटी के युद्ध में वो मुगल सेना के सेनापति थे.

मीर जाफ़र

तीसरे गद्दार का नाम है मीर जाफ़र . मीर जफ़र के राज को भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद की शुरुआत माना जाता है. बता दें कि मीर जाफ़र वर्ष 1757 से 1760 तक बंगाल के नवाब रहे थे और वह सिराजुद्दौला के सेनापति थे. उसने प्लासी के युद्ध में रोबर्ट क्लाइव के साथ मिल गया और रोबर्ट ने जाफ़र को बंगाल का नवाब बनाने का लालच दे दिया था. माना जाता है कि इसी घटना के बाद भारत में ब्रिटिश राज की स्थापना की शुरु हो गई थी .

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