भारत के इस मंदिर के आगे चाँद पर पहुंचने वाले वैज्ञानिक भी मान गए हार, बोले- हिंदू धर्म है महान !जानिये पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रहस्मयी अजूबे !

जानिये पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रहस्मयी अजूबे !

जानिये पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रहस्मयी अजूबे,जिन्हें जानकर हैरान हो जाएँगे आप… दोस्तों माना जाता है कि भगवान विष्णु जब चारों धामों पर बसे अपने धामों की यात्रा पर जाते हैं तो हिमालय की ऊंची चोटियों पर बने अपने धाम बद्रीनाथ में स्नान करते हैं. पश्चिम में गुजरात के द्वारिका में वस्त्र पहनते हैं. पुरी में भोजन करते हैं और दक्षिण में रामेश्‍वरम में विश्राम करते हैं. द्वापर के बाद भगवान कृष्ण पुरी में निवास करने लगे और बन गए जग के नाथ अर्थात जगन्नाथ.

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रहस्मयी अजूबे !

बता दें कि जगन्नाथ मंदिर के ऊपर स्थापित लाल ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है. ऐसा किस कारण होता है यह कोई नहीं जानता, लेकिन यह अपने आप में आश्चर्यचकित कर देने वाली बात है. दोस्तों यह दुनिया का सबसे भव्य और ऊंचा मंदिर है. इतना ही नहीं दोस्तों आश्चर्य की बात यह है कि मुख्य गुंबद की परछाई दिन के किसी भी समय दिखाई नहीं देती.

वैसे तो दोस्तों सामान्य दिनों में हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है और शाम को इसके विपरीत, लेकिन पुरी में इसका उल्टा होता है. अधिकतर समुद्री तटों पर आमतौर पर हवा समुद्र से जमीन की ओर आती है, लेकिन यहां हवा जमीन से समुद्र की ओर जाती है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुरी में किसी भी स्थान से आप मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही लगा दिखेगा, इसे नीलचक्र भी कहते हैं.

यह अष्टधातु से निर्मित है और अति पावन और पवित्र माना जाता है. गौरतलब है कि मंदिर के सिंह द्वार में पहला कदम प्रवेश करने पर ही (मंदिर के अंदर से) आप सागर द्वारा निर्मित किसी भी ध्वनि को नहीं सुन सकते. आप (मंदिर के बाहर से) एक ही कदम को पार करें, तब आप इसे सुन सकते हैं. इतना ही नहीं मंदिर के ऊपर गुंबद के आस-पास अब तक कोई पक्षी उड़ता हुआ नहीं देखा गया. इसके ऊपर से विमान नहीं उड़ाया जा सकता. मंदिर के शिखर के पास पक्षी उड़ते नजर नहीं आते.

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